MENTORS

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अय्यर क्लाससेस ने किया अनोखा एंव सफल प्रयोग

अय्यर क्लाससेस कोरबा का सबसे अग्रणी, प्रतिष्ठित एवं सत्रह वर्ष पुराना कोचिंग संस्थान है। लगभग २००० से अधिक छात्रों ने इस संस्थान की सेवाएँ प्राप्त किया है और आज एक सफल जिंदगी जी रहे हैं। खुशी की बात यह कि आज भी उनमे से कई छात्र संस्था से अपना संबंध बनाए रखें हैं और संस्था द्वारा उनके जिंदगी में हुए उन्नति के लिए कृतज्ञता प्रकट करते हैं। इनही बातों का नतीजा है कि एक ही परिवार के अन्य सदस्य छात्र वापस इसी संस्था में आकर शिक्षा ग्रहण करते हैं।

पुराने छात्रों से हुई चर्चा में उन्होने संस्था के लिए अपना बहुमूल्य सहयोग देने की इच्छा जाहिर की। पिछले साल जब इस विषय पर मंथन हुआ तो संस्था ने पुराने छात्रों से मिलकर एक प्रयोग करने पर सहमति हुई। वर्तमान में जो छात्र शिकक्षा ग्रहण कर रहे हैं उनमे से कुछ मेधावी छात्रों को चुनकर पुराने छात्रों का सहयोग प्राप्त करने को कहा गया। इस तरह छात्रों को मेनटरशिप की नई सुविधा मुहैया कराया गया। इसके तहत छात्र एवं मैंटर (जो की हमारे ही पुराने छात्र हैं) एक दूसरे को चुनते हैं। सप्ताह में कम से कम एक बार एक दूसरे से विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं। यदि छात्र गरीब हो तो मेंटोर्स उन्हे आर्थिक रूप से भी सहायता करते हैं। इस प्रयोग से छात्र एवं मेंटोर्स दोनों ही बहुत खुश हैं।

इस प्रयोग के पहले चरण में नेहा लाहिरी (IIT कानपुर) ने सुमित सिंह को, शैलेश चौहान (NIT तिरुचि) ने आशीष मिश्रा को, आयाज़ सिद्धिकी (NIT कुरुक्षेत्र) ने अलन पीटर्स को, अचिंत्य कुनाल ने अनुराग सिंह को, गीतिका कुकरेजा (IIT खड़कपुर) ने राहुल प्रसाद को एवं शहरिक इस्लाम (IIT कानपुर) ने तौसिफ़ अहमद को अपना सहयोग दिया। अय्यर क्लाससेस की संस्थापक श्रीमती राजश्री अय्यर ने आशा व्यक्त की कि दूसरे चरण (२०१९-२०) में यह सुविधा कम से कम १० और बच्चों को देंगे। श्रीमति अय्यर ने सहयोग देने वाले सभी पुराने छात्रों को अपना आभार व्यक्त किया एवं उम्मीद जताई कि यह सहयोग निरंतर चलता रहेगा।

अय्यर क्लाससेस के बच्चों ने शिक्षा के अलावा सेवा भाव एवं संस्कार भी सीखा

अय्यर क्लाससेस के बच्चों को 17 साल का अनुभव एवं पुराने सीनियर बच्चों के अपने प्रिय कोचिंग सेंटर से लगाव का भरपूर फाइदा मिल रहा है। इस संस्था का दिल को छूने वाली परंपरा के कारण जरूरतमंद बच्चों को नई किताब नहीं खरीदना पड़ता है। पुराने बच्चे अपनी किताबों को संस्था मे लाकर जमा कर देते हैं और संस्था उन्हे होनहार एवं जरूरतमंद बच्चों को दे देती है।यह परंपरा पिछले कई वर्षों से चल रही है।

इस संस्था के छात्र आज कई मुख्य पदों पर विराजमान हैं एवं संस्था के संपर्क में है। उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि संस्था के माध्यम से जरूरतमंद छात्रों हर संभव मदद की जाए। इनमे जरूरतमन्द बच्चों को कोंम्पैटिटिव परीक्षा के लिए प्रवेश शुल्क का देना, इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबों को खरीदकर देना शामिल है। जरूरत की चीजों की जानकारी मिल जानेपर मदद के लिए तत्पर पुराने छात्र अमेज़ोन, फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लैटफ़ार्म से सीधे बच्चों तक पहुंचा देते हैं।

संस्थापक श्रीमति राजश्री अय्यर मैडम का कहना है कि उन्हे इस बात का बेहद संतोष है कि उनके बच्चों ने शिक्षा के अलावा अच्छे संस्कार भी ग्रहण किया है। इस सिलसिले में उनके कुछ प्रिय छात्र श्रीकांत सुबरमनियन, नेहा लाहीरी, रितेश पांडे, पल्लव अग्रवाल, शहरिक इस्लाम, अर्पिता माहेश्वरी, सौरभ दीक्षित, आयाज़ सिद्दीकी एवं गीतिका कुकरेजा हमेशा सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।